Secure Socket Layer (SSL) & Transport Layer Security (TLS) in Cryptography Explained in Hindi & English | सुरक्षित सॉकेट लेयर (SSL) और ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (TLS) क्रिप्टोग्राफी में (Complete Notes for Data Science & Information Security Students)


सुरक्षित सॉकेट लेयर (SSL) और ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (TLS) क्रिप्टोग्राफी में

परिचय:

SSL (Secure Socket Layer) और TLS (Transport Layer Security) इंटरनेट संचार को सुरक्षित बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल हैं। इनका उद्देश्य वेब सर्वर और क्लाइंट (जैसे ब्राउज़र) के बीच डेटा ट्रांसमिशन को एन्क्रिप्ट करना है ताकि किसी तीसरे पक्ष द्वारा डेटा को पढ़ा या बदला न जा सके।

SSL और TLS का उपयोग वेबसाइटों में HTTPS कनेक्शन स्थापित करने, ईमेल सुरक्षा, और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन प्रोटेक्शन के लिए किया जाता है।


SSL और TLS का इतिहास:

  • SSL 1.0 (1995): Netscape द्वारा विकसित लेकिन कभी सार्वजनिक नहीं हुआ।
  • SSL 2.0 (1995): कई कमजोरियों के कारण असफल।
  • SSL 3.0 (1996): सुधारित संस्करण लेकिन बाद में BEAST Attack के कारण अप्रचलित।
  • TLS 1.0 (1999): SSL 3.0 का सुरक्षित संस्करण, IETF द्वारा मानकीकृत।
  • TLS 1.2 (2008) और TLS 1.3 (2018): वर्तमान में उपयोग में सबसे सुरक्षित संस्करण।

SSL/TLS के उद्देश्य:

  • Confidentiality: डेटा को एन्क्रिप्ट करके सुरक्षित करना।
  • Integrity: संदेश में किसी प्रकार का परिवर्तन न होना।
  • Authentication: सर्वर और उपयोगकर्ता दोनों की पहचान सत्यापित करना।
  • Non-Repudiation: किसी भी पक्ष द्वारा संचार से इनकार न किया जा सके।

SSL/TLS कार्यप्रणाली:

SSL/TLS एक Handshake Protocol पर आधारित होता है, जिसमें Client और Server के बीच सुरक्षित सत्र (Session) स्थापित होता है।

SSL/TLS Handshake Steps:

  1. Client Hello: क्लाइंट सर्वर को बताता है कि वह कौन-से एन्क्रिप्शन एल्गोरिद्म को सपोर्ट करता है।
  2. Server Hello: सर्वर Client को अपना प्रमाणपत्र (Certificate) और चयनित एल्गोरिद्म भेजता है।
  3. Certificate Verification: क्लाइंट सर्वर के SSL Certificate की वैधता CA से Verify करता है।
  4. Session Key Generation: क्लाइंट और सर्वर दोनों मिलकर एक Symmetric Session Key बनाते हैं।
  5. Secure Communication Start: अब डेटा ट्रांसफर उस एन्क्रिप्टेड Key से होता है।

SSL/TLS Architecture:

1️⃣ Record Protocol:

यह डेटा को विभाजित करके एन्क्रिप्ट करता है और संदेश की अखंडता (Integrity) सुनिश्चित करता है।

2️⃣ Handshake Protocol:

यह Client और Server के बीच Authentication और Key Exchange करता है।

3️⃣ Change Cipher Spec Protocol:

यह संकेत देता है कि दोनों पक्ष अब सुरक्षित मोड में हैं।

4️⃣ Alert Protocol:

त्रुटियों या Connection Closure की सूचना देता है।


SSL/TLS में प्रयुक्त क्रिप्टोग्राफिक तकनीकें:

  • Asymmetric Cryptography (RSA, ECC): Key Exchange और Authentication के लिए।
  • Symmetric Cryptography (AES, ChaCha20): Data Encryption के लिए।
  • Hash Functions (SHA-256, SHA-512): Message Integrity के लिए।
  • Digital Certificates (X.509): Server Authentication के लिए।

TLS 1.3 में सुधार:

  • Fewer Round Trips — तेज कनेक्शन।
  • Forward Secrecy — पुरानी Keys से डेटा डिक्रिप्ट नहीं किया जा सकता।
  • Stronger Cipher Suites (AES-GCM, ChaCha20-Poly1305)।
  • Legacy Algorithms जैसे SHA-1, RC4 हटाए गए।

SSL/TLS का उदाहरण:

Client: Browser → Server: www.bank.com
1. Client Hello
2. Server Hello + Certificate
3. Key Exchange
4. Secure Session Established
अब डेटा HTTPS द्वारा सुरक्षित रूप से ट्रांसफर होता है ✅

SSL/TLS के लाभ:

  • Data Encryption द्वारा गोपनीयता सुनिश्चित।
  • Server और User Authentication।
  • Data Tampering से सुरक्षा।
  • Online Payment और Transaction Security।

SSL/TLS की सीमाएँ:

  • Certificate Expiry पर Connection Fail हो सकता है।
  • Improper Configuration से MITM Attack संभव।
  • Costly Certificates छोटे संगठनों के लिए चुनौती।

वास्तविक जीवन उपयोग:

  • Online Banking Websites (HTTPS)
  • E-Commerce Platforms (Amazon, Flipkart)
  • Email Encryption (SMTP over TLS)
  • VPN Connections
  • API Communication Security

निष्कर्ष:

SSL और TLS इंटरनेट सुरक्षा के स्तंभ हैं। यह डेटा की गोपनीयता, सत्यता, और अखंडता सुनिश्चित करते हैं। आज हर वेबसाइट और एप्लिकेशन के लिए SSL/TLS का उपयोग अनिवार्य है ताकि उपयोगकर्ता का डेटा सुरक्षित रह सके।

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