IEEE 802.11i Wireless LAN Security in Cryptography Explained in Hindi & English | आईईईई 802.11i वायरलेस LAN सुरक्षा क्रिप्टोग्राफी में (Complete Notes for Data Science & Information Security Students)


आईईईई 802.11i वायरलेस LAN सुरक्षा क्रिप्टोग्राफी में (IEEE 802.11i Wireless LAN Security in Cryptography)

परिचय:

IEEE 802.11i वायरलेस नेटवर्क सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मानक है, जिसे Wi-Fi नेटवर्क को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए विकसित किया गया था। यह 2004 में प्रकाशित हुआ और इसने पुराने WEP (Wired Equivalent Privacy) की जगह लेकर WPA2 को मानक बनाया। इस मानक में AES (Advanced Encryption Standard) और 802.1X Authentication Framework जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया।


802.11i मानक का उद्देश्य:

  • वायरलेस संचार की गोपनीयता और अखंडता सुनिश्चित करना।
  • मजबूत एन्क्रिप्शन के माध्यम से डेटा सुरक्षा बढ़ाना।
  • सर्वर और क्लाइंट दोनों की प्रमाणीकरण प्रक्रिया को मजबूत करना।
  • अनधिकृत एक्सेस और नेटवर्क हमलों से बचाव करना।

802.11i की मुख्य विशेषताएँ:

  • WEP की कमजोरियों को खत्म करना।
  • Robust Security Network (RSN) Framework का परिचय।
  • Authentication के लिए 802.1X और EAP (Extensible Authentication Protocol) का उपयोग।
  • Encryption के लिए AES-CCMP का उपयोग।
  • 4-Way Handshake प्रक्रिया का कार्यान्वयन।

802.11i आर्किटेक्चर:

802.11i तीन मुख्य घटकों पर आधारित है:

  • Supplicant: क्लाइंट डिवाइस जो नेटवर्क से जुड़ना चाहता है।
  • Authenticator: Access Point जो कनेक्शन को नियंत्रित करता है।
  • Authentication Server (RADIUS): उपयोगकर्ता की पहचान सत्यापित करता है।

802.11i में प्रमाणीकरण (Authentication) प्रक्रिया:

  1. Supplicant (Client) नेटवर्क से जुड़ने का अनुरोध भेजता है।
  2. Authenticator उस अनुरोध को Authentication Server को अग्रेषित करता है।
  3. Server EAP के माध्यम से उपयोगकर्ता की पहचान की पुष्टि करता है।
  4. एक बार प्रमाणन सफल हो जाने पर, एक Pairwise Master Key (PMK) उत्पन्न की जाती है।
  5. फिर 4-Way Handshake प्रक्रिया शुरू होती है ताकि Encryption Key (PTK) बनाई जा सके।

802.11i में एन्क्रिप्शन तंत्र:

1️⃣ AES-CCMP (Counter Mode Cipher Block Chaining Message Authentication Code Protocol):

यह AES आधारित एन्क्रिप्शन तकनीक है जो WEP और TKIP से कहीं अधिक सुरक्षित है। CCMP डेटा गोपनीयता (Confidentiality), अखंडता (Integrity), और प्रमाणिकता (Authenticity) सुनिश्चित करता है।

2️⃣ Temporal Key Integrity Protocol (TKIP):

यह WPA में उपयोग हुआ था, लेकिन 802.11i में इसे केवल बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी के लिए रखा गया। AES-CCMP को डिफ़ॉल्ट सुरक्षा एल्गोरिद्म बनाया गया।


4-Way Handshake प्रक्रिया:

1️⃣ Access Point और Client PMK के आधार पर Nonce (Random Number) एक्सचेंज करते हैं।
2️⃣ दोनों पक्ष PTK (Pairwise Transient Key) उत्पन्न करते हैं।
3️⃣ यह Key डेटा एन्क्रिप्शन और MIC Verification के लिए उपयोग होती है।
4️⃣ अब सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन शुरू होता है।

802.11i में उपयोग होने वाली क्रिप्टोग्राफिक तकनीकें:

  • AES-128/256: Data Encryption के लिए।
  • SHA-256: Message Integrity के लिए।
  • HMAC: Authentication Verification के लिए।
  • RSA / ECC: Certificate आधारित Authentication के लिए।

802.11i की सुरक्षा विशेषताएँ:

  • Mutual Authentication – Client और Server दोनों की पहचान।
  • Dynamic Key Generation – हर सत्र के लिए नई Key।
  • Replay Attack Protection।
  • Data Integrity Verification।
  • Management Frame Protection।

802.11i नेटवर्क खतरे और समाधान:

हमलाविवरणसमाधान
Rogue APफर्जी Access Point से जुड़ना802.1X Authentication
Replay Attackपुराने पैकेट्स को फिर से भेजनाNonce और Sequence Checking
Man-in-the-Middleबीच में डेटा इंटरसेप्ट करनाAES-CCMP Encryption
Deauthentication AttackClient को नेटवर्क से Disconnect करनाManagement Frame Protection

वास्तविक जीवन उदाहरण:

  • Enterprise Wi-Fi Networks में WPA2-Enterprise
  • University Campuses में RADIUS आधारित Authentication
  • IoT Devices में Lightweight AES Encryption
  • Public Hotspots में VPN over WPA2

निष्कर्ष:

IEEE 802.11i ने वायरलेस नेटवर्क सुरक्षा को एक नए स्तर पर पहुँचाया है। इसने मजबूत Authentication, Dynamic Key Management, और AES Encryption को अपनाकर Wi-Fi को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बना दिया है। यह मानक आधुनिक क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक है।

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