Single Sign-On (SSO) in Cryptography Explained in Hindi & English | क्रिप्टोग्राफी में सिंगल साइन-ऑन (Single Sign-On) (Complete Notes for Data Science & Information Security Students)


क्रिप्टोग्राफी में सिंगल साइन-ऑन (Single Sign-On - SSO)

परिचय:

Single Sign-On (SSO) एक क्रिप्टोग्राफिक प्रमाणीकरण (Authentication) तकनीक है जो उपयोगकर्ता को एक बार लॉगिन करके कई एप्लिकेशनों या सेवाओं तक पहुँचने की अनुमति देती है। यह उपयोगकर्ता की पहचान (Identity) को सुरक्षित रूप से साझा करने और सत्यापित करने के लिए क्रिप्टोग्राफी, टोकनाइजेशन, और फेडरेटेड आइडेंटिटी मैनेजमेंट का उपयोग करता है।

SSO का उपयोग Google, Microsoft, Amazon, और सरकारी सिस्टम जैसे प्लेटफार्मों पर किया जाता है ताकि उपयोगकर्ता को हर बार नया लॉगिन करने की आवश्यकता न हो।


SSO की आवश्यकता:

  • सुरक्षित और केंद्रीकृत पहचान प्रबंधन (Centralized Identity Management)।
  • पासवर्ड थकान (Password Fatigue) को कम करना।
  • एकीकृत उपयोगकर्ता अनुभव (Unified User Experience)।
  • डेटा सुरक्षा और गोपनीयता में सुधार।

SSO का कार्य सिद्धांत:

SSO क्रिप्टोग्राफी और Authentication Protocols पर आधारित होता है जैसे — OAuth 2.0, SAML (Security Assertion Markup Language), OpenID Connect आदि।

1️⃣ उपयोगकर्ता SSO सर्वर में लॉगिन करता है (Username + Password)।  
2️⃣ सर्वर उपयोगकर्ता को Authenticate करता है और एक Token (Encrypted Credential) जारी करता है।  
3️⃣ जब उपयोगकर्ता किसी अन्य सेवा तक पहुँचता है, तो वही Token पहचान प्रमाण के रूप में उपयोग किया जाता है।  
4️⃣ अन्य एप्लिकेशन SSO Server के साथ Token को Verify करते हैं।  
5️⃣ यदि Token Valid है, तो उपयोगकर्ता को तुरंत एक्सेस मिलता है।

SSO के घटक:

  • Identity Provider (IdP): उपयोगकर्ता की पहचान की पुष्टि करता है (जैसे Google, Microsoft, Okta)।
  • Service Provider (SP): वह एप्लिकेशन या सेवा जो SSO स्वीकार करती है।
  • Authentication Token: Encrypted Credential जो उपयोगकर्ता की पहचान को प्रमाणित करता है।
  • Session Management: सक्रिय लॉगिन सत्र को ट्रैक करता है।

SSO में उपयोग होने वाले प्रोटोकॉल:

1️⃣ SAML (Security Assertion Markup Language):

  • XML आधारित प्रोटोकॉल।
  • IdP और SP के बीच Authentication जानकारी साझा करता है।
  • Enterprise और Web-based Applications में उपयोग होता है।

2️⃣ OAuth 2.0:

  • Token आधारित Authorization Framework।
  • SSO और API Access दोनों के लिए प्रयोग।
  • उदाहरण: “Login with Google / Facebook”।

3️⃣ OpenID Connect (OIDC):

  • OAuth 2.0 का Extension है।
  • JSON Web Tokens (JWTs) का उपयोग करता है।
  • Cloud और Mobile Applications के लिए आधुनिक मानक।

SSO में उपयोग होने वाली क्रिप्टोग्राफी:

  • Symmetric Encryption: Token Data को एन्क्रिप्ट करने के लिए।
  • Asymmetric Encryption: Digital Signatures और Authentication के लिए।
  • Hash Functions: Password Hashing और Data Integrity के लिए।
  • Digital Certificates (X.509): Identity Validation के लिए।

SSO के लाभ:

  • उपयोगकर्ता के लिए सुविधा — केवल एक लॉगिन की आवश्यकता।
  • सुरक्षा में वृद्धि — पासवर्ड कम उपयोग होते हैं।
  • सेंट्रलाइज्ड Access Control।
  • कम IT Maintenance और बेहतर Monitoring।

SSO की सीमाएँ:

  • यदि मुख्य SSO खाता Compromise हो जाए, तो सभी सेवाएँ जोखिम में होंगी।
  • Implementation लागत और जटिलता अधिक।
  • Third-party IdP पर भरोसा आवश्यक।

SSO के वास्तविक उदाहरण:

  • Google Workspace (Gmail, Drive, YouTube एक ही लॉगिन से)।
  • Microsoft Azure Active Directory।
  • Facebook Connect, Okta, AWS IAM।

SSO की सुरक्षा सुनिश्चित करने के तरीके:

  • Multi-Factor Authentication (MFA) जोड़ना।
  • OAuth Tokens की Expiry सीमित करना।
  • Digital Certificate Validation।
  • Session Timeout और Audit Trails।

निष्कर्ष:

Single Sign-On (SSO) एक शक्तिशाली पहचान प्रबंधन समाधान है जो उपयोगकर्ता अनुभव को सरल और सुरक्षित बनाता है। यह क्रिप्टोग्राफी के माध्यम से प्रमाणीकरण और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करता है। Data Science और Information Security के छात्रों के लिए, SSO आधुनिक एंटरप्राइज सुरक्षा आर्किटेक्चर का अभिन्न अंग है।

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