IEEE 802.11 Wireless LAN in Cryptography Explained in Hindi & English | आईईईई 802.11 वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क क्रिप्टोग्राफी में (Complete Notes for Data Science & Information Security Students)


आईईईई 802.11 वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क क्रिप्टोग्राफी में (IEEE 802.11 Wireless LAN in Cryptography)

परिचय:

IEEE 802.11 एक नेटवर्किंग मानक है जो वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क (WLAN) के लिए डेटा संचार और कनेक्टिविटी को परिभाषित करता है। यह वही मानक है जिस पर Wi-Fi तकनीक आधारित है। क्रिप्टोग्राफी का उपयोग इस मानक में डेटा ट्रांसमिशन को सुरक्षित करने, उपयोगकर्ताओं को प्रमाणित करने, और नेटवर्क अखंडता बनाए रखने के लिए किया जाता है।


IEEE 802.11 का इतिहास:

  • IEEE 802.11 (1997): मूल मानक, 2 Mbps डेटा दर के साथ।
  • 802.11b (1999): 11 Mbps डेटा स्पीड।
  • 802.11a/g: 54 Mbps स्पीड और बेहतर रेंज।
  • 802.11n (2009): MIMO तकनीक के साथ उच्च स्पीड (600 Mbps तक)।
  • 802.11ac (2013): Gigabit Wi-Fi (5 GHz)।
  • 802.11ax (Wi-Fi 6): आधुनिक, तेज़ और अधिक सुरक्षित संस्करण।

IEEE 802.11 की संरचना:

802.11 नेटवर्क तीन मुख्य घटकों पर आधारित होता है:

  • Access Point (AP): नेटवर्क से जुड़ने का केंद्र।
  • Station (STA): क्लाइंट डिवाइस जैसे लैपटॉप, मोबाइल आदि।
  • Distribution System (DS): Access Points को जोड़ने वाला नेटवर्क बैकबोन।

सुरक्षा तंत्र (Security Mechanisms):

IEEE 802.11 में कई स्तरों पर क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा लागू की जाती है:

1️⃣ Authentication:

  • Open System Authentication: कोई पासवर्ड नहीं — असुरक्षित।
  • Shared Key Authentication: Pre-Shared Key के माध्यम से प्रमाणीकरण।
  • 802.1X Authentication: Enterprise Level Authentication (RADIUS Server आधारित)।

2️⃣ Encryption:

डेटा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए विभिन्न एन्क्रिप्शन तकनीकें उपयोग होती हैं:

  • WEP (Wired Equivalent Privacy): RC4 आधारित पुरानी प्रणाली।
  • WPA (Wi-Fi Protected Access): TKIP प्रोटोकॉल के साथ सुधारित सुरक्षा।
  • WPA2: AES-CCMP आधारित आधुनिक एन्क्रिप्शन।
  • WPA3: SAE (Simultaneous Authentication of Equals) तकनीक के साथ सबसे सुरक्षित प्रणाली।

802.11 सुरक्षा फ्रेमवर्क:

सुरक्षा के लिए तीन प्रमुख स्तरों पर सुरक्षा लागू की जाती है:

  • Physical Layer Security: RF Interference और Jamming से बचाव।
  • MAC Layer Security: Authentication और Access Control।
  • Data Layer Security: Encryption और Integrity Verification।

क्रिप्टोग्राफिक तकनीकें:

  • AES (Advanced Encryption Standard): WPA2/WPA3 में उपयोग।
  • RC4: WEP में उपयोग किया गया लेकिन अब अप्रचलित।
  • SHA-256: Data Integrity के लिए।
  • Elliptic Curve Cryptography (ECC): Lightweight और Mobile Devices के लिए उपयुक्त।

WPA2 4-Way Handshake प्रक्रिया:

1️⃣ Client AP से जुड़ता है।
2️⃣ AP और Client Nonce और PMK (Pairwise Master Key) का आदान-प्रदान करते हैं।
3️⃣ दोनों एक समान Session Key (PTK) बनाते हैं।
4️⃣ Secure Data Transmission शुरू होता है।

802.11 में आम सुरक्षा खतरे:

  • Rogue Access Points
  • Evil Twin Attacks
  • Deauthentication Attacks
  • Packet Sniffing और Replay Attacks
  • Session Hijacking

सुरक्षा समाधान:

  • WPA3 Encryption का उपयोग।
  • MAC Filtering और Hidden SSID।
  • 802.1X Authentication।
  • VPN over Wi-Fi।
  • Regular Firmware Updates।

वास्तविक जीवन में उपयोग:

  • कॉर्पोरेट ऑफिस Wi-Fi नेटवर्क।
  • Airports और Public Hotspots में WPA3 आधारित Access।
  • Home Routers में WPA2-PSK सुरक्षा।
  • IoT Devices में Lightweight Encryption।

निष्कर्ष:

IEEE 802.11 वायरलेस LAN ने आधुनिक नेटवर्किंग को मोबाइल और लचीला बना दिया है। लेकिन इसके साथ सुरक्षा चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। WPA3 जैसे आधुनिक क्रिप्टोग्राफिक प्रोटोकॉल और मजबूत Authentication तकनीकें इन नेटवर्कों को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाती हैं।

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